.. title: §27ـ हसन कूज़ा-गर २
.. slug: itoohavesomedreams/poem_27
.. date: 2016-03-02 15:55:18 UTC
.. tags: poem itoohavesomedreams rashid
.. link: 
.. description: Devanagari version of "Ḥasan kūzah-gar 2"
.. type: text



| ऐ जहाँ-ज़ाद,
|     नशात उस शब-ए बे-राह रवी की
|         मैं कहाँ तक भूलूँ?
| ज़ोर-ए मै था, कि मिरे हाथ की लर्ज़िश थी
|     कि उस रात कोई जाम गिरा टूट गया—
| तुझे हैरत न हुई!
| कि तिरे घर के दरीचों के कई शीशों पर
| उस से पहले की भी दर्ज़ें थीं बहुत—
| तुझे हैरत न हुई!
| 
| ऐ जहाँ-ज़ाद,
|     मैं कूज़ों की तरफ़, अपने तग़ारों की तरफ़
| अब जो बग़दाद से लौटा हूँ,
|     तो मैं सोचता हूँ—
| सोचता हूँ: तू मिरे सामने आईना रही
| सर-ए बाज़ार, दरीचे में, सर-ए बिस्तर-ए संजाब कभी
| तू मिरे सामने आईना रही,
| जिस में कुछ भी नज़र आया न मुझे
|     अपनी ही सूरत के सिवा
| अपनी तंहाई-ए जांकाह की दहशत के सिवा!
| लिख रहा हूँ तुझे ख़त
|     और वो आईना मिरे हाथ में है
| इस में कुछ भी नज़र आता नहीं
|     अब एक ही सूरत के सिवा!
| लिख रहा हूँ तुझे ख़त
|     और मुझे लिखना भी कहाँ आता है?
| लूह-ए आईना पे अश्कों की फुवारों ही से
|         ख़त क्यों न लिखूँ?
| 
| ऐ जहाँ-ज़ाद,
|     नशात उस शब-ए बे-राह रवी की
|         मुझे फिर लाएगी?
| वक़्त क्या चीज़ है तू जानती है?
| वक़्त इक ऐसा पतंगा है
| जो दीवारों पे, आईनों पे,
|     पैमानों पे, शीशों पे,
|         मिरे जाम‐ओ‐सबू, मेरे तग़ारों पे
|                     सदा रेंगता है
| रेंगते वक़्त के मानिंद कभी
|     लौट-के आएगा हसन कूज़ा-गर-ए सोख़्ता-जाँ भी शायद!
| 
| अब जो लौटा हूँ, जहाँ-ज़ाद,
|     तो मैं सोचता हूँ:
| शायद इस झोंपड़े की छत पे ये मकड़ी मिरी महरूमी की—
| जिसे तनती चली जाती है, वो जाला तो नहीं हूँ मैं भी?
| ये सियह झोंपड़ा मैं जिस में पड़ा सोचता हूँ
| मेरे अफ़्लास के रौंदे हुए अज्दाद की
|         बस एक निशानी है यही
| उन के फ़न, उन की मीशत की कहानी है यही
| मैं जो लौटा हूँ तो वो सोख़्ता-बख़्त
|             आ-के मुझे देखती है
| देर तक देखती रह जाती है
| मेरे इस झोंपड़े में कुछ भी नहीं—
| खेल इक सादा मुहब्बत का
| शब‐ओ‐रोज़ के इस बड़ते हुए खोखले-पन में जो कभी
| खेलते हैं
| कभी रो लेते हैं मिल-कर, कभी गा लेते हैं
|         और मिल-कर कभी हंस लेते हैं
| दिल के जीने के बहाने के सिवा और नहीं—
| हर्फ़ सर्हद हैं, जहाँ-ज़ाद, मआनी सर्हद
| इश्क़ सर्हद है, जवानी सर्हद
| अश्क सर्हद हैं, तबस्सुम की रवानी सर्हद
| दिल के जीने के बहाने के सिवा और नहीं—
| (दर्द-ए मजरूमी की,
|     तंहाई की सर्हद भी कहीं है कि नहीं?)
| 
| मेरे इस झोंपड़े में
|     कितनी ही ख़ुशबुएँ हैं
| जो मिरे गिर्द सदा रेंगती हैं
| उसी इक रात की ख़ुशबू की तरह रेंगती हैं—
| दर‐ओ‐दीवार से लपटी हुई इस गिर्द की ख़ुशबू भी है
| मेरे अफ़्लास की, तंहाई की,
|     यादों की, तमन्नाओं की ख़ुशबुएँ भी,
| फिर भी इस झोंपड़े में कुछ भी नहीं—
| ये मिरा झोंपड़ा तारीक है, गंदा है, पुरा गंदा है
| हाँ, कभी दूर दरख़्तों से परिंदों की सदा आती है
| कभी अंजीरों के, ज़ैतूनों के बाग़ों की महक आती है
| तो में जी उठता हूँ
| तो मैं कहता हूँ कि लो आज नहा-कर निकला!
| वर्ना इस घर में कोई सेज नहीं, इत्र नहीं है,
| कोई पंखा भी नहीं,
| तुझे जिस इश्क़ की ख़ू है
|     मुझे उस इश्क़ का यारा भी नहीं!
| 
| तू हंसेगी, ऐ जहाँ-ज़ाद, अजब बात
| कि जज़बात का हातिम भी मैं
| और अश्या के परस्तार भी मैं
| और सर्वत जो नहीं उस का तलब-गार भी मैं!
| तू जो हंसती रही उस रात तज़ब्ज़ुब पे मिरे
| मेरी दो-रंगी पे फिर से हंस दे!
| इश्क़ से किस ने मगर पाया है कुछ अपने सिवा?
| ऐ जहाँ-ज़ाद,
| है हर इश्क़ सवाल ऐसा कि आशिक़ के सिवा
|     उस का नहीं कोई जवाब
| यही काफ़ी है कि बातिन की सदा गूंज उठे!
| 
| ऐ जहाँ-ज़ाद
|     मिरे गोशा-ए बातिन की सदा ही थी
|         मिरे फ़न की ठिठरती हुई सदयों
|             के किनारे गूंजी
| तेरी आंखों के समंदर का किनारा ही था
|         सदयों का किनारा निकला
| ये समंदर जो मिरी ज़ात का आईना है
| ये समंदर जो मिरे कूज़ों के बिगड़े हुए
|         बनते हुए सीमाओं का आईना है
| ये समंदर जो हर इक फ़न का
|     हर इक फ़न के परस्तार का
|         आईना है

|left arrow link|_

|right arrow link|_



.. |left arrow link| replace:: :emoji:`arrow_left` §26. हसन कूज़ा-गर 
.. _left arrow link: /hi/itoohavesomedreams/poem_26

.. |right arrow link| replace::  §28. हसन कूज़ा-गर ३ :emoji:`arrow_right` 
.. _right arrow link: /hi/itoohavesomedreams/poem_28

.. admonition:: I Too Have Some Dreams: N. M. Rashed and Modernism in Urdu Poetry


  .. link_figure:: /itoohavesomedreams/
        :title: I Too Have Some Dreams Resource Page
        :class: link-figure
        :image_url: /galleries/i2havesomedreams/i2havesomedreams-small.jpg
        
.. _جمیل نوری نستعلیق فانٹ: http://ur.lmgtfy.com/?q=Jameel+Noori+nastaleeq
 

