.. title: §24ـ तलब के तले
.. slug: itoohavesomedreams/poem_24
.. date: 2016-03-02 15:55:18 UTC
.. tags: poem itoohavesomedreams rashid
.. link: 
.. description: Devanagari version of "T̤alab ke tale"
.. type: text



| गुल‐ओ‐यास्मिन कल से ना-आशना,
|         कल से बे-एतिना
| गुल‐ओ‐यास्मिन अपने जिस्मों की हैअत में फ़र्द
| मगर—कल से ना-आशना, कल से बे-एतिना
| किसी मर्ग-ए मब्रम का दर्द
|     उन के दिल में नहीं!
| 
| फ़क़त अपनी तारीख़ की बे-सर‐ओ‐पा तलब के तले
| हम दबे हैं!
| हम अपने वुजूदों की पिंहाँ तहें
| खोलते तक नहीं
| आर्ज़ू बोलते तक नहीं!
| ये तारीख़ मेरी नहीं और तेरी नहीं
| ये तारीख़ है इज़्दिहाम-ए रवाँ
| उसी इज़्दिहाम-ए रवाँ की ये तारीख़ है,
| ये वो चीख़ है
|     जिस की तकरार अपने मन‐ओ‐तू में है
| वो तकरार जो अपनी तहज़ीब की हू में है!
| 
| तुझे इस पे हैरत नहीं
| हम इस इज़्दिहाम-ए रवाँ के निशान-ए क़दम पर चले जा रहे हैं
| बड़े जा रहे हैं
| कि हम ज़ुल्मत-ए शब में तंहा
|     पड़े रह न जाएँ—
| बड़े जा रहे हैं,
| न जीने की ख़ातिर
|     न इस से फ़िज़ूँ ज़िंदा रहने की ख़ातिर
| बड़े जा रहे हैं, किसी ऐब से
|     रहज़न-ए मर्ग से बच निकलने की ख़ातिर,
| जुदाई की ख़ातिर!
| किसी फ़र्द के ख़ौफ़ से बड़ रहे हैं
| जो बातिन के टूटे दरीचों के पीछे
| शरारत से हंसता चला जा रहा है—

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.. admonition:: I Too Have Some Dreams: N. M. Rashed and Modernism in Urdu Poetry


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        :title: I Too Have Some Dreams Resource Page
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.. _جمیل نوری نستعلیق فانٹ: http://ur.lmgtfy.com/?q=Jameel+Noori+nastaleeq
 

