.. title: §21ـ ज़माना ख़ुदा है
.. slug: itoohavesomedreams/poem_21
.. date: 2016-03-02 15:55:17 UTC
.. tags: poem itoohavesomedreams rashid
.. link: 
.. description: Devanagari version of "Zamānah ḳhudā hai"
.. type: text



| "ज़माना ख़ुदा है, इसे तुम बुरा मत कहो"
| मगर तुम नहीं देखते—ज़माना फ़क़त रेस्मान-ए ख़याल
| सबुक-माया, नाज़ुक, तवील
|     जुदाई की अर्ज़ां सबील!
| 
| वो सुबहें जो लाखों बरस पेशतर थीं,
| वो शामें जो लाखों बरस बाद होंगी,
| उंहें तुम नहीं देखते, देख सकते नहीं
| कि मौजूद हैं, अब भी, मौजूद हैं वो कहीं,
| मगर ये निगाहों के आगे जो रससी तनी है
| इसे देख सकते हो, और देखते हो
| कि ये वो अदम है
| जिसे हस्त होने में मुद््दत लगेगी
| सितारों के लम्हे, सितारों के साल!
| 
| मिरे सहन में एक कमसिन बनफ़शे का पौदा है
| तययारा कोई कभी उस के सर पर से गुज़रे
| तो वो मुस्कराता है और लहलहाता है
| गोया वो तययारा, उस की मुहब्बत में
| अहद-ए वफ़ा के किसी जब्र-ए ताक़त-रुबा ही से गुज़रा!
| वो ख़ूश एतिमादी से कहता है:
| "लो देखो, कैसे इसी एक रससी के दोनों किनारों
| से हम तुम बंधे हैं!
| ये रससी न हो तो कहाँ हम में तुम में
| हो पैदा ये राह-ए विसाल?"
| मगर हिज्र के उन वसीलों को वो देख सकता नहीं
| जो सरासर अज़ल से अबद तक तने हैं!
| जहाँ ये ज़माना—हनूज़-ए ज़माना
|     फ़क़त इक गिरह है!

|left arrow link|_

|right arrow link|_



.. |left arrow link| replace:: :emoji:`arrow_left` §20. रेग-ए दीरूज़ 
.. _left arrow link: /hi/itoohavesomedreams/poem_20

.. |right arrow link| replace::  §22. अफ़्साना-ए शहर :emoji:`arrow_right` 
.. _right arrow link: /hi/itoohavesomedreams/poem_22

.. admonition:: I Too Have Some Dreams: N. M. Rashed and Modernism in Urdu Poetry


  .. link_figure:: /itoohavesomedreams/
        :title: I Too Have Some Dreams Resource Page
        :class: link-figure
        :image_url: /galleries/i2havesomedreams/i2havesomedreams-small.jpg
        
.. _جمیل نوری نستعلیق فانٹ: http://ur.lmgtfy.com/?q=Jameel+Noori+nastaleeq
 

