.. title: §14ـ तमाशागा-ए लाला-ज़ार
.. slug: itoohavesomedreams/poem_14
.. date: 2016-03-02 15:55:17 UTC
.. tags: poem itoohavesomedreams rashid
.. link: 
.. description: Devanagari version of "Tamāshāgah-e lālah-zār"
.. type: text



| तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार,    
|     "तियातर" पे मेरी निगाहें जमी थीं
|     मिरे कान "मूज़ीक" के ज़ेर‐ओ‐बम पर लगे थे,
|     मगर मेरा दिल फिर भी करता रहा था
|     अरब और अजम के ग़मों का शुमार
|         तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार!
| 
| तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार,
|     अब ईराँ कहाँ है?
|     ये इशक़ी का शहकार—"ईरान की रुस्तख़ेज़!"
|     अब ईराँ है इक नौहा-गर पीर-ज़ाल
|     है मुद््दत से अफ़्सुर्दा जिस का जमाल,
|     मदाइन की वीरानियों पर अजम अश्क-रेज़,
|     वो नौशीरवां और ज़र्दुश्त और दारियूश,
|     वो फ़रहाद‐ओ‐शीरीं, वो कैख़ुसरव‐ओ‐कैक़ुबाद
|     "हम इक दास्ताँ हैं वो किर्दार थे दास्ताँ के!
|     हम इक कारवां हैं वो सालार थे कारवां के!"
|         ता-ए ख़ाक जिन के मज़ार
|         तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार!
| 
| तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार,
|     मगर नौहा-ख़्वानी की ये सर-गिरानी कहाँ तक?
|     कि मंज़िल है दुशवार ग़म से ग़म-ए जाविदाँ तक!
|     वो सब थे कुशादा-दिल‐ओ‐होश-मंद‐ओ‐परस्तार-ए रब्ब-ए करीम
|     वो सब ख़ैर के राह-दाँ, रह-शिनास
|     हमें आज मोह्सिन-कुश‐ओ‐ना-सिपास!
|     वो शाहंशहान-ए अज़ीम
|     वो पिंदार-ए रफ़्ता का जाह‐ओ‐जलाल-ए क़दीम
|     हमारी हज़ीमत के सब बे-बहा तार‐ओ‐पू थे,
|     फ़ना उन की तक़दीर, हम उन की तक़दीर के नौहा-गर हैं
|         उसी की तमन्ना में फिर सोग-वार
|         तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार
| 
| तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार,
|     अरूस-ए जवाँ-साल-ए फ़र्दा, हिजाबों में मस्तूर
|     गुरिस्ना-निगह, ज़ूद-कारों से रंजूर
|     मगर अब हमारे नए ख़्वाब काबूस-ए माज़ी नहीं हैं,
|     हमारे नए ख़्वाब हैं, आदम-ए नौ के ख़्वाब
|     जहान-ए तग‐ओ‐दौ के ख़्वाब!
|     जहान-ए तग‐ओ‐दौ, मदाइन नहीं,
|         काख़-ए फ़ग़फ़ूर‐ओ‐कुसरा नहीं
| ये उस आदम-ए नौ का मावा नहीं
|     नई बस्तियाँ और नए शहर्यार
|         तमाशा-गा-ए लाला-ज़ार!

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.. admonition:: I Too Have Some Dreams: N. M. Rashed and Modernism in Urdu Poetry


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        :title: I Too Have Some Dreams Resource Page
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.. _جمیل نوری نستعلیق فانٹ: http://ur.lmgtfy.com/?q=Jameel+Noori+nastaleeq
 

